Lata Mangeshkar: स्वर कोकिला “भारत रत्न” लता मंगेशकर का 92 साल की उम्र में निधन



लता दीदी का जन्म

उनकी छोटी बहन का नाम आशा भोंसले है वह उन्हें दीदी कहकर पुकारती थी इसलिए पूरा देश भी उन्हें दीदी कह कर ही पुकारता था, लता दीदी का जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में हुआ था उनके पिता का नाम दीनानाथ मंगेशकर था वह भी रंगमंच के गायक थे, लता दीदी ने भी 14 वर्ष की उम्र से ही अपने कैरियर की शुरुआत कर दी थी परंतु शुरू में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा क्योंकि पहले उन्हें कई बार रिजेक्ट कर दिया जाता था यह कहकर कि उनकी आवाज ज्यादा पतली है, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कला को निखारते हुए पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन किया और लगभग 6 दशकों तक बॉलीवुड और संगीत के क्षेत्र में अपना दबदबा कायम रखा। जब उन्हें भारत रत्न से नवाजा गया तब भी उन्होंने भारत सरकार से यही कहा था कि युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित कीजिए और यह अवार्ड भी किसी युवा को ही दिया जाना चाहिए लेकिन भारतीय युवा भी सभी यही चाहते थे कि इस अवार्ड से उनको भी नवाजा जाए और उनके सम्मान में यह अवार्ड भी बहुत छोटा है।

लता दीदी का कैरियर

हर सफल व्यक्ति के पीछे एक कठिन संघर्ष छुपा हुआ होता है यह कहना बिल्कुल सही होगा लता दीदी के लिए भी क्योंकि छोटी सी उम्र मात्र 13 वर्ष की आयु में ही उनके पिता का साया उनके ऊपर से उठ गया था, परिवार की जिम्मेदारी भी सबसे बड़ी बेटी होने के नाते उनके ऊपर ही थी, तब उन्होंने अपने कैरियर के रूप में संगीत को चुना हालांकि उन्हेंफिल्मों में अभिनय करने के अवसर भी प्राप्त हुए लेकिन वह अपना पूरा फोकस केवल संगीत पर ही करना चाहती थी इसलिए उन्होंने एक्टिंग के क्षेत्र को भी छोड़ दिया, फिल्म इंडस्ट्री में गुलाम हैदर को उनके गॉडफादर की तरह माना जाता था क्योंकि उन्होंने ही लता मंगेशकर के टैलेंट को पहचाना था और उनके संघर्ष के दिनों में उनका पूरा साथ दिया था। लता दीदी ने अपनापहला गाना एक मराठी फिल्म कीति हसाल में गाया था परंतु वह गाना रिलीज नहीं हुआ, उसके बाद भी उन्होंने कई फिल्मों में गीत गाए परंतु उनका पहला हिट गाना “आयेगा आने वाला” फिल्म महल से था उसके बाद तो उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा संगीत के क्षेत्र में एक से एक ताबड़तोड़ गाने और एक से एक ताबड़तोड़ पुरस्कार लेकर पूरे विश्व में एक नई पहचान बनाई।

पुरस्कार

लता दीदी के पुरस्कारों की बात करें तो यह लिस्ट बहुत लंबी है फिल्म फेयर पुरस्कार जो कि उन्हें कई बार मिल चुके हैं इसके अलावा राष्ट्रीय पुरस्कार इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार एवं पद्म भूषण दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड पद्म विभूषण भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” नूरजहां पुरस्कार, ज़ी सिने लाइफ अचीवमेंट पुरस्कार, राजीव गांधी पुरस्कार, एनटीआर पुरस्कार, स्क्रीन का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार आदि और भी कई पुरस्कार हैं।

राष्ट्रीय शोक घोषित

लता दीदी के निधन पर पूरे देश में 2 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया गया है, पूरे देश की आंखें नम है और उन्हें याद कर रही हैं, युवा पीढ़ी की प्रेरणा लता दीदी आज हम सबके बीच में नहीं हैं कला के क्षेत्र में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और ना ही उसकी भरपाई की जा सकती है लता दीदी को विनम्र श्रद्धांजलि।

 

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